गीतांजलि – रवीन्द्र नाथ टैगोर : हिन्दी भावानुवाद

गीतांजलि गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर की विशिष्ट काव्य-रचना है। यह मूलतः बांग्ला में लिखी गयी थी और कालान्तर में स्वयं गुरुदेव ने इस रचना का अंग्रेजी रूपान्तर किया। अंग्रेजी में प्रकाशित इस कृति ने भारतीय कविता को विश्वमंच पर विशिष्ट पहचान दी। इस रचना के लिए गुरुदेव रवीन्द्र को साहित्य के प्रतिष्ठित नोबल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

टैगोर की इस कालजयी गीतांजलि के कुछ गीतों का गीतात्मक, काव्यात्मक भावानुवाद पिताजी श्री प्रेम नारायण पंकिल ने किया था, जो सच्चा शरणम् पर एक-एक कर प्रकाशित होता रहा है। इन गीतों के हिन्दी अनुवाद काव्यात्मक एवं गेय हैं, और इन गीतों में हिन्दी के मूल गीतों-सा रस व्याप्त है। गीतांजलि के गीतों का भाव ग्रहण करते हुए अपनी मौलिक प्रतिभा का विनिवेश भी किया है पिता जी ने और रम्य छन्दबद्ध अनुवाद प्रस्तुत किया है।

यद्यपि गीतांजलि के इन गीतों में अभी भी अधिकांश गीतों का अनुवाद प्रकाशित नहीं हुआ है, परन्तु निश्चित ही शेष अनुवाद भी क्रमशः प्रविष्टियों के रूप में सच्चा शरणम् पर आयेंगे। गुरुदेव के कई अन्य गीत भी अनुवाद के रूप में हिन्दी में अनुवाद कर प्रकाशित किये जाने की स्थिति में हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *