रम्यांतर : एक आमंत्रण

ब्रह्मानन्दसहोदर साहित्य का आँचल पकड़े  रचनाकार की साहित्यिक, दार्शनिक, आध्यात्मिक एवं  स्वान्तःसुखीन रचनाओं का सहज प्रकाशन है रम्यांतर पर। लोकभाषा की सहज मिठास का दर्शन सर्वत्र है यहाँ। अवगाहन के लिए आमंत्रण ! अंग्रेजी भाषा-साहित्य की अनगिन रचनाओं का हिन्दी में काव्यानुवाद एवं अनेकों मौलिक अंग्रेजी रचनायें इस पृष्ठ को एक नया आयाम देती हैं। इनसे  परिचित हों, आमंत्रण!

शैलबाला शतक (1-20)

जीवन में ऐसे क्षण अपनी आवृत्ति करने में नहीं चूकते जब जीवन का केन्द्रापसारी बल केन्द्राभिगामी होने लगता है। मेरे बाबूजी की ज़िन्दगी की उसी बेला की उपज है शैलबाला शतक! अनेकों झंझावातों में उलझी हुई जीवन की गति को जगदम्बा की ही शरण सूझी। अभाव-कुभाव-दुर्भाव में विक्षिप्त स्वभाव को शैलबाला के बिना कहाँ से सम्बल मिलता! इसलिए सहज वाणी में सहज प्रवाह को सरस्वती की सनकार मिली! अपनी लोकभाषा में माँ का स्तवन-वन्दन-आत्मनिवेदन और समर्पण का जो ज्वार उमड़ा वह थमने का नाम नहीं ले रहा था। कहीं कोई बनावट नहीं, कोई सजावट नहीं, कोई दिखावट नहीं..बस बिछ गया तो बिछ गया अपनी माई के चरणॊं में। जैसे हर पंक्ति आशीर्वाद होती गयी और माँ की वन्दना से निहाल होते गये बाबूजी। अपने से अपनी बात का यह सहज स्वाभाविक उच्छलन ही है शैलबाला शतक।

निर्वाण षटकम् : आचार्य शंकर

आचार्य शंकर की विशिष्ट कृति सौन्दर्य लहरी के पठन क्रम में एक अन्य स्तोत्र-रचना निर्वाण षटकम् से साक्षात हुआ था। सहज और सरल प्रवाहपूर्ण संस्कृत ने इस रचना में निमग्न कर दिया था मुझे। बस पढ़ने के लिए ही हिन्दी में लिखे गए इसके अर्थों को थोड़ी सजावट देकर आपके सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हूँ। शिवरात्रि से सुन्दर अवसर और क्या होगा इस प्रस्तुति के लिए। आचार्य शंकर और शिव-शंकर दोनों के चरणों में प्रणति!

The Canonization: John Donne (Hindi Translation)

The Canonization: John Donne (Original Text)

FOR God’s sake hold your tongue, and let me love ;
Or chide my palsy, or my gout ;
My five gray hairs, or ruin’d fortune flout ;
With wealth your state, your mind with arts improve ;
Take you a course, get you a place,
Observe his Honour, or his Grace ;
Or the king’s real, or his stamp’d face
Contemplate ; what you will, approve,
So you will let me love.